Wednesday, September 19, 2012

चिराग




चिराग


है चिराग लेकिन बुझा नहीं
तूफानों मैं है जला वही
अंधियारे का है शत्रु वो

और उजियारे का लाल वही ।


झंझावाती काले बादल
गरजे उस पर, बुझ जाने को,
तब चमकी बिजली आसमान से
उसक का ढाढस बंधवाने को ।



लहराई शमा, प्रेयसी उसकी
कहा साथ रहेंगे जनम जनम
जो हाथ लगाया दीपक को
मैं भस्म करूंगी बादल को ।



बादल बिखरे, सूरज आया
सहलाने अपने बालक को
वंदन में सारा जग उसके 
जिसने जीता अंधियारे को ।
                              ___संकल्प सक्सेना ।



बेमन से जब मौत ने बाहें अपनी फैलायीं , बतलाया नाम ' शहादत'
हंस के प्राण न्यौछावर कर दिए और ब्याह गए ' शहादत' ।
                                                                                     ___ संकल्प सक्सेना ।

Saturday, May 26, 2012

मेरी कोशिशों के सामने खड़ा है, मेरे मौला
मैं भी दिखादूंगा, दीवानगी किसको कहते हैं ।
                                             संकल्प सक्सेना ।

Thursday, May 24, 2012


है प्रेम द्वंद्व छिड़ा हुआ,
कविता यहाँ की मिट्टी है
हथ्यार क़लम और स्याही हैं
यही कवी की सृष्टि है ।
                 ___संकल्प सक्सेना ।



कई रंगों का भीगा हूँ,
मेरा रंग हो गया मैला
अपने रंग को भूल गया,
हूँ तेरे रंग का भीगा ।
                ___संकल्प सक्सेना ।
मुझे  बदला और ख़ुद बदल गए, जाने ज़िन्दगी में कितने दर्द भर गए
आज भी प्यार से पुरनम  घड़ियों का इंतज़ार है,
न वो हैं, न  उनके साए हैं ।
                                                   ____ संकल्प सक्सेना ।
जब इक दौर से गुज़रता हूँ
क्यूँ लगता सब तरफ़ इतना शोर
जब दौर गुज़र जाता है
होता सन्नाटा चरों ओर
फिर शोर मचाती हैं यादें
और गुज़रे तन्हाई का दौर 
देख रहा हूँ दस्तक देता
चला आ रहा नया दौर ।
                             ____संकल्प सक्सेना ।