Friday, March 15, 2013

हम तो वो मोती हैं ,जो कहीं गहराई लिए बैठे हैं 
सीप की नर्म बाहों में,तन्हाई लिए बैठे हैं।
                                                               __संकल्प सक्सेना 'लवि'।

वो सो रहे हैं, रात की आगोश में 
यहाँ नींद नहीं, 'भोर' मुझे होश में। 

तुम तो अपनी बाहों में एक गुड्डा लेके सोती हो 
यहाँ नींद आती है तन्हाई की आगोश में। 

दूरियों ने बसंत को वीरान कर दिया 
अब तो आयेगा सावन 'लवि' नर्म आग़ोश में।
___ संकल्प सक्सेना 'लवि' ।

Friday, March 1, 2013

मेरा परिचय


मेरा परिचय 

खुशियाँ हों जहां, मेरा परिचय 
हो प्रेम जहां,  मेरा परिचय 
गीतों की धुन, मेरा परिचय 
साजों पर सुर, मेरा परिचय 
होठों से बरसे शब्द सुरा 
अधरों की अगन, मेरा परिचय। 

परिचय मेरा जब उनसे हुआ 
धड़कन से हुआ मेरा परिचय 
सुलगी साँसें, बेचैन ये दिल 
बहके मौसम, मेरा परिचय।

जीवन के क्षण, नहिं कोई किरण 
तन्हाई थी, मेरा परिचय
क्षितिज रेखा और साहिल में,
मिलने की ललक,  मेरा परिचय। 

'लवि' प्रेम के बीच समंदर में 
खिलते ये सुमन, मेरा परिचय 
इठलाती चलती मस्त पवन 
मेहके सावन, मेरा परिचय। 

मिटटी का तन, 
मस्ती का मन 
क्षण बहर जीवन 
मेरा परिचय।
                                       __ संकल्प सक्सेना 'लवि'। 

Inspired by,

मिटटी का तन, 
मस्ती का मन 
क्षण बहर जीवन 
मेरा परिचय।
                  __ डॉ . हरिवंश राय बच्चन।

 

Wednesday, February 6, 2013

बिदाई

 बिदाई 

कुछ , चंद लम्हे घर पे अपने 
फिर दुनिया नयी, पराई भी 
नैनों के दर्पण से छलके 
यादों की शेहनाई भी। 

बचपन की यादों से लेकर 
यौवन की अंगड़ाई भी 
जात पिता की स्वप्न सुन्दरी 
रोए  है शेहनाई भी। 

सखियों की आँखें अब नम हैं 
बहे श्वेत अश्रु के कण हैं 
बीते क्षण की यादें गाती 
सिसके है शेहनाई भी।

आँख छलक आयीं अब मेरी 
कटु हुआ जीवन का क्षण है 
 'लवि', जटिल रीत के हाथ बज रही 
क्रंदन है शेहनाई भी।
                                                        ___ संकल्प सक्सेना 'लवि'।

Friday, January 25, 2013

यादों के दिए


यादों के दिए

बनके तेरी यादों के दिए , जलते हैं 
ये ज़मीन आसमां तले, जलते हैं 

कट रही है ये ज़िन्दगी 
सहमी राहें हैं 
है गुज़ारिश कि हो सेहर 
तेरे शाने में 

खो रहा हूँ मैं बेवजह ,तेरे कूंचे में 
अब न दरकार है मुझे ,इस ज़माने से 

मैं पनाहों में हूँ तेरी,बज़्म कहती है 
कर दे एक नज़्म तू अदा, शान - ए - महफ़िल में 

दिल की गहराईयों में आज , बेरहम बेनज़ीर 
आज हम बेक़स - ए - चिराग, जलते हैं 

बनके तेरी यादों के दिए , जलते हैं 
ये ज़मीन आसमां तले, जलते हैं 
                                      ____संकल्प सक्सेना 'लवि'
कूंचे: गली ,बेनजीर: unmatchable / uncomparable ,बेक़स : Lonely 

Tuesday, January 22, 2013

रूठी क़लम




















रूठी क़लम 

क़लम मेरी क्यों सो रही तुम? 
क्या तुम्हें एहसास है ?
क्या है बीती इस ह्रदय पे? 
क्या मेरे जज़्बात हैं ?

क्यों नहीं तुम जागती हो? 
तुम हो ख़ुद प्राची किरण 
तुम हो वो स्वछन्द चिड़िया 
जिसको ना बांधे गगन 

क्यों है ये आलस तुम्हें ?
क्यों सोयी हो शव सी कहो? 
हंस रहे हैं लोग मुझपे 
दम तोड़ता 'लवि' अब जगो 

ग़र नहीं तुम में हो रंग 
मेरे ग़म से लेलो रंग 
मान जाओ मेरी प्रियवर 
फिर न दिखें रूठे बलम ।
                                                      __ संकल्प सक्सेना 'लवि' ।

पूनम





एहसास विमल( Vimalendu Tiwari) के शब्द लवि के 


पूनम 



दिल का साज़ है पूनम 
अस्फ़िया( Pure, clear ,white) रात है पूनम 
जो उपजे दिल की धड़कन से 
अश्हर (famous,Popular) ये गीत है पूनम 

ये ज़ुल्फ़ें रात है पूनम 
बदन ये चांदनी पूनम 
जो होती है तू रातों में 
जवां हर कैकशां पूनम 

आया हूँ मैं कोठे पे 
मेरी तन्हाइयां चुप हैं 
नहीं तू सामने मेरे 
मगर ये रात है पूनम 

तेरी यादों के साए में 
उफ़नता गीत ये पूनम 
क़लम व्याकुल 'लवि' की है 
'विमल' एहसास है पूनम 
                                                           ____संकल्प सक्सेना 'लवि '