Wednesday, April 2, 2014




आवाहन 

जहां कभी 
ख़ुशियाँ थीं
बहारें थीं 
गीतों के गलियारे थे 
ग़ज़लों से महके ग़लीचे थे 
नज़मों में  ढलती शाम थी 
वहीं आज ख़ामोशी है,सन्नाटा है 
शाखों से टूटे पत्तों पर 
पतझड़ के चलने कि, बेबस आहट है 

लेकिन! फिर भी मुझे इक आस नज़र आती है 
फिर से कहीं वो, एक उम्मीद जगा जाती है 
अँधेरे कि चादर को हल्का सा उठाती है 
नन्ही सी गौरैया बहारों को बुलाती है 
यका याक उषा कि किरण नज़र आती है 
समर में , निशा से, उषा जीत ही जाती है 
खोए हुए कलरव को, वो फिर से जगाती है 
गाओ मेरे दीवानों , वो सबको बुलाती है। 
                                              __ संकल्प सक्सेना 'मुरीद'। 

Saturday, March 29, 2014


एहसास-ए- मोहब्बत

एक  सतरंगी फ़ुहार थी, बहती मन कि बयार थी
खोती थीं दिल कि धड़कने, आँखों से रिस्ती धार थी।

खिलती कलियाँ जब बाग़ में , पीहू कोयल कि पुकार थी
भंवरों कि गुंजन, फिर वही, गीतों कि बरसती धार थी।

क्यों सागर मरुथल हो रहा, नदिया कि कैसी चाल थी
नयनों को झुका के आ गई, धड़कन सागर कि निसार थी।

मेरी पहली तहरीर थी, 'वारिस' की जैसे हीर थी
गीतों कि धुन में ढल गई, सरगम थी या वो प्यार थी।

फिर रफ्ता रफ्ता खो गयी, ज्यों धुंद सुबह के प्यार की 
ख़ुद में ही खोते हैं 'मुरीद', यादों कि इक झनकार थी।
                                                __ संकल्प सक्सेना 'मुरीद'।





 

Sunday, February 16, 2014

जिसे हम प्यार कहते हैं, वो जलता है शमाओं में
तड़पता है वो बिजली सा, मचलता है शुआओं में।

क़यामत बनके जो गिरती है आँखों से तेरे मानिन्द
वो बिजली कौंध जाती है, मेरे दिल कि हवाओं में।

हवा चलती है तो, जर्रों में  उठती है जवानी सी
बहारें फिर मचलती हैं, सिमटती हैं अदाओं में।


मोहब्बत दिल के ज़र्रों में, असर यूं छोड़ जाती है 
तेरी धड़कन में  खोता हूँ, मैं खोता हूँ वफ़ाओं  में।
                                         
'मुरीद' अब जान जाते हैं, कहाँ है रोशनी तेरी
तेरी साँसों की आहट से, जो बस्ती है दुआओं में।
                                              __ संकल्प सक्सेना 'मुरीद'।

Saturday, January 4, 2014

कुछ तो है जो आँख भींचे, ख़ींच कर लाता मुझे
और तेरी महफ़िलों में, छोड़ कर जाता मुझे।

आज तेरे रास्तों पर, बढ़ रहे मेरे क़दम
और उस रूहानियत में, छोड़ कर जाता मुझे।

जो समय कि बंदिशों के, पार है बैठा उधर,
वो समय के रास्तों पर, छोड़ कर जाता मुझे।

अनगिनत प्यालों के शीशे, जो हैं बिखरे राह में
य़ाद में  उन महफिलों की, छोड़ कर जाता मुझे।

तुम भले हो दूर कितने, फिर भी मैं हूँ देखता
एक किरन के रास्ते जो, छोड़ कर जाता मुझे।

झील है तेरी निग़ाहें, जिस में जग है डूबता
नाख़ुदा बन पार उसके, छोड़ कर जाता मुझे।

तेरे संग-ओ-दर पे है, इस आस पर बैठा 'मुरीद'
कौन है जो इस किनारे, छोड़ कर जाता मुझे।
                                         ___ संकल्प सक्सेना 'मुरीद'।
 

Friday, December 27, 2013



सन २०१३ जाने को है। इस बीते साल ने भी हर साल कि तरह बहुत कुछ सिखलाया।कई ऐसे पाठ जीवन के जो शायद गीता/क़ुरान या बाइबल भी आसानी से न समझा पाएं। इस सन २०१३ में बीते हर लम्हे को मेरा नमन और भावभीनि विदाई।
आप सभी का नव वर्ष २०१४ मंगलमय और सुखद हो यही शुभकामनाएं।

सांझ हो रही है 
सब तरफ हर्ष है उल्हास है 
एक सूरज जाने को है 
कोई उसे मनाने को है। 

बहुत सी यादें जो दे गया है मुझे 
कई नए मीत जो दे गया है मुझे 
कैसे जाने दूं ऐसे साक़ी को 
जो नया जाम दे गया है मुझे। 

फिर नए फूल खिल खिलाएंगे 
फिर नए गीत सरसरायेंगे 
तू कहीं दूर सो रहा होगा 
हम तुझे  में  बुलाएंगे। 

आँख से जो है रिस्ता पानी सा 
हम तुझे सीप में सजाएंगे 
होंगे मोती कई जो राहे सफ़र 
फिर तेरे गीत गुनगुनाएंगे।  

बेसबब जो है तूने सिखलाया 
उसको हर्फ-ओ-क़ुरान करते हैं 
जो अफ़ाक़-ओ-शफ़क़ में डूब गया 
क़लम-ए-इमाम इश्क़ करते हैं।
                                                  __ संकल्प सक्सेना 'मुरीद'।  

बेसबब- selfless /unreasonable
अफ़ाक़ - horizon, क्षितिज
शफ़क़ - सूर्यास्त के समय आकाश मैं फ़ैली लाली, redness  in  the  sky
हर्फ़- शब्द, words

Friday, November 8, 2013

तुम्हारी नज़र...For My Love


तुम्हारी नज़र...For My Love


तुम्हारी नज़र 

तुम्हारी नज़र का ,असर कुछ हुआ है 
कि धड़कन मेरी, साज़ तेरी दुआ है।

अभी तुझसे मिलने का, पैग़ाम लेकर 
हवा जो मिली, वो तेरी ही अदा है।

अदाओं के जलवों में, खोए हुए हम 
मेरी आह में, आज कैसा नशा है।

खिली है कली देखो, महका चमन है 
सजा गुलसितां और बहकी फ़िज़ा है।

तुम्हारी निगाहों में खोए हुए हम 
मेरी ईद हो, अब तू ही आसरा है।
                                                     __ संकल्प सक्सेना 'मुरीद'।

Sunday, November 3, 2013


मेरे सभी मित्रों को दीपावली कि हार्दिक शुभकामनाएं। आप सभी का नव वर्ष मंगलमय हो।

दीपों कि सौगात

दीपों कि लड़ी नयनों में  सजी 
कजरा मावस कि रात 
चांदी जैसा मुखड़ा दमके 
ज्यों पूनम कि रात।

वो तन्हाई, वो वीराने 
तिमिर में कहीं खो गए 
नैनों से जब नैन मिलाये 
दीपों कि सौगात।
चांदी जैसा मुखड़ा दमके 
ज्यों पूनम कि रात।

शमा जली परवाने आये 
प्रेम गीत पे लौ इतराए 
बाति बने प्रेम की साथी 
दीपों कि सौगात।
चांदी जैसा मुखड़ा दमके 
ज्यों पूनम कि रात।

नूर नयन से धुली फ़िज़ायें 
'मुरीद' हुए तेरे रूप के साये 
तेरी राह चलें हैं अब तो 
दीपों कि सौगात।
चांदी जैसा मुखड़ा दमके 
ज्यों पूनम कि रात।
                                                         __ संकल्प सक्सेना 'मुरीद'।