Thursday, January 19, 2012

भूख


मेरे मित्र  धीरज ने मुझे दफ़्तर में  उनकी  स्वलिखित चार पंक्तियाँ सुनाईं 

न ये पैसा होता, न ये इच्छाएं होतीं ,
न दोस्त  तू अलग  होता, न दोस्त  मैं जुदा होता,
न ये पैसा होता, न ये इच्छाएं होतीं ,
न दोस्त आज तू दुखी होता, न दोस्त आज मैं ग़मगीन होता ।
                                                                             ----धीरज पुनिया |

यह पंक्तियाँ जैसे मेरे दिल को गहराइयों तक छू गईं और जन्मा हुआ इस कविता का,

भूख

न ये भूख होती,न ये  मजबूरियाँ होतीं ,
न ये इन्सां बुरा होता,न  वो इन्सां दुखी होता ।

चंद रोटियों के लालच में,
बिकते हैं ईमान यहाँ
उभरती हैं लकीरें माँ के सीने पर 
और बनते भारत पाक वहाँ ।

इन्सां नहीं है भ्रष्ट 
भूख करती ईमान नष्ट
पनपता है पैसा विदेशों में
बिलखते माँ के लाल यहाँ ।

किसी को भूख पैसे की
कोई इज्ज़त का है भूखा
किसी को भूख जिस्मों की
कोई है प्यार का भूखा ।

न ये भूख होती, न पैसा होता,
न इन्सां का नष्ट, 'ज़मीर ' होता
होता दुनिया में अमन चैन,
न दुनिया बनानेवाला ख़ुदा होता ।
                                                                       ____ संकल्प सक्सेना ।







Monday, January 2, 2012

Happy New Year 2012


महफ़िल है जामों की, निगाहें शराबों सी,

बरसादे नूर मेरे ख़ुदा, महफ़िल प्यासे पैमामों की ।
                                                                                                              ___संकल्प सक्सेना ।

Tuesday, December 6, 2011

श्रद्धांजलि to Star of Romance DEV ANAND


श्रद्धांजलि 

मेरा कौन था वो
क्या नाता था
जो जाते जाते रुला गया 
मेरा मीत नहीं
मेरा गीत नहीं 
मेरे दिल में फिर भी समां गया

वो नूर का सच्चा बंद था
वो प्रेम का दीप जलाता था
जब नूर के साथ चमकता था
तब नूर भी शर्माता था

ग़म उसका सजदा करते थे
उल्फ़त के गीत सुनाता था
जीवन से प्रीत निभाने का
वो सबको पाठ पढ़ता था

प्रियतम उसके सजदे में था
वो रोक न पाया अब ख़ुद को
यम उसके सजदे में था 
वो चला गया है सत पथ को

न भाई था, न बन्धु वो
न उस्से रक्त का नाता था
वो साज़ है मेरी धड़कन का
वो लहू में गीत बहता था  । 
                                                        ------   संकल्प सक्सेना 

Sunday, November 13, 2011

पता नहीं


पता नहीं

कुछ  है तू मेरे लिए
क्या है ? पता नहीं

सूरज की किरण है
या चंदा की रौशनी
क्या है ? पता नहीं
कहीं दरख़्त की छांव है
या जीवन की नाव है 
क्या है पता नहीं

शिल्पकार की मार है
कहीं प्यार भरी सौगात है
क्या है पता नहीं

फ़लक पे छ रही है
मेरे दिल को लुभा रही है
चाँद चमकता रहे
खुद को जला रही है
क्यों ? पता नहीं

मेरे दिल की आवाज़ है
या गीतों का साज़ है
क्या है पता नहीं
शायर की ग़ज़ल है 
या कवी का प्रकाश है 
क्या है पता नहीं

मेरे जीवन की ज्योत है
राहों का प्रकाश है
क्यों ? पता नहीं

क्या कहूं, शायर की अभिलाषा है तू
क्यों ? पता नहीं ।
                                                                                               ___संकल्प सक्सेना ।
                                                   

Monday, October 24, 2011

॥ शुभ दीपावली॥




यह अंधेरों का जलवा है, सजदे में उजाले हैं 

यह रात का जलवा है, सजदे में सितारे हैं

यह हुस्न का जलवा है, संग अँधेरे उजाले हैं 
                          
__संकल्प सक्सेना ।                                                                                                                                           

॥ शुभ दीपावली॥



बिखरती ज़ुल्फें हैं, अमावास की रात है,
दमकती शमा है, दीपावली की रात है ।
                                                                         __ संकल्प सक्सेना ।

Monday, October 10, 2011

श्रद्धांजलि


श्रद्धांजलि 

दोस्तों, आज सुबह की ख़बर कुछ ऐसी पड़ी मेरे कानो पर
रोने लगी कलम मेरी नैनों से बरसे नीर।

फिर ख़ामोश हुए ग़ालिब,
फिर से चुप हैं मीर,
आज ख़ामोश है ग़ज़ल
नज़्म बहा रही है नीर ।

बदला था हमें उन ने 
अब छोड़ गए हैं
दे गए हैं यादें
हम संभालेंगे पीर ।
                            ___ संकल्प सक्सेना.