Wednesday, February 6, 2013

बिदाई

 बिदाई 

कुछ , चंद लम्हे घर पे अपने 
फिर दुनिया नयी, पराई भी 
नैनों के दर्पण से छलके 
यादों की शेहनाई भी। 

बचपन की यादों से लेकर 
यौवन की अंगड़ाई भी 
जात पिता की स्वप्न सुन्दरी 
रोए  है शेहनाई भी। 

सखियों की आँखें अब नम हैं 
बहे श्वेत अश्रु के कण हैं 
बीते क्षण की यादें गाती 
सिसके है शेहनाई भी।

आँख छलक आयीं अब मेरी 
कटु हुआ जीवन का क्षण है 
 'लवि', जटिल रीत के हाथ बज रही 
क्रंदन है शेहनाई भी।
                                                        ___ संकल्प सक्सेना 'लवि'।

Friday, January 25, 2013

यादों के दिए


यादों के दिए

बनके तेरी यादों के दिए , जलते हैं 
ये ज़मीन आसमां तले, जलते हैं 

कट रही है ये ज़िन्दगी 
सहमी राहें हैं 
है गुज़ारिश कि हो सेहर 
तेरे शाने में 

खो रहा हूँ मैं बेवजह ,तेरे कूंचे में 
अब न दरकार है मुझे ,इस ज़माने से 

मैं पनाहों में हूँ तेरी,बज़्म कहती है 
कर दे एक नज़्म तू अदा, शान - ए - महफ़िल में 

दिल की गहराईयों में आज , बेरहम बेनज़ीर 
आज हम बेक़स - ए - चिराग, जलते हैं 

बनके तेरी यादों के दिए , जलते हैं 
ये ज़मीन आसमां तले, जलते हैं 
                                      ____संकल्प सक्सेना 'लवि'
कूंचे: गली ,बेनजीर: unmatchable / uncomparable ,बेक़स : Lonely 

Tuesday, January 22, 2013

रूठी क़लम




















रूठी क़लम 

क़लम मेरी क्यों सो रही तुम? 
क्या तुम्हें एहसास है ?
क्या है बीती इस ह्रदय पे? 
क्या मेरे जज़्बात हैं ?

क्यों नहीं तुम जागती हो? 
तुम हो ख़ुद प्राची किरण 
तुम हो वो स्वछन्द चिड़िया 
जिसको ना बांधे गगन 

क्यों है ये आलस तुम्हें ?
क्यों सोयी हो शव सी कहो? 
हंस रहे हैं लोग मुझपे 
दम तोड़ता 'लवि' अब जगो 

ग़र नहीं तुम में हो रंग 
मेरे ग़म से लेलो रंग 
मान जाओ मेरी प्रियवर 
फिर न दिखें रूठे बलम ।
                                                      __ संकल्प सक्सेना 'लवि' ।

पूनम





एहसास विमल( Vimalendu Tiwari) के शब्द लवि के 


पूनम 



दिल का साज़ है पूनम 
अस्फ़िया( Pure, clear ,white) रात है पूनम 
जो उपजे दिल की धड़कन से 
अश्हर (famous,Popular) ये गीत है पूनम 

ये ज़ुल्फ़ें रात है पूनम 
बदन ये चांदनी पूनम 
जो होती है तू रातों में 
जवां हर कैकशां पूनम 

आया हूँ मैं कोठे पे 
मेरी तन्हाइयां चुप हैं 
नहीं तू सामने मेरे 
मगर ये रात है पूनम 

तेरी यादों के साए में 
उफ़नता गीत ये पूनम 
क़लम व्याकुल 'लवि' की है 
'विमल' एहसास है पूनम 
                                                           ____संकल्प सक्सेना 'लवि '

Tuesday, November 27, 2012

किनारा ढूँढ़ता हूँ



किनारा ढूँढ़ता हूँ 

नव जन्मों की राहों से, मैं आकर सांस लेता हूँ , किनारा ढूँढ़ता हूँ 
ये स्वागत में खड़ी दुनिया, मैं रोकर मुस्कराता हूँ, किनारा ढूँढ़ता हूँ 

मैं कहता हूँ मैं सुनता हूँ, ज़ुबां से लडखड़ाता हूँ , किनारा ढूँढ़ता हूँ 
मैं गिरता हूँ, मैं उठता हूँ, मैं   उठकर मुस्कराता हूँ, किनारा ढूँढ़ता हूँ 

मेरी राहें, मेरे सपने, फ़लक मंजिल बनाता  हूँ, किनारा ढूँढ़ता हूँ 
मैं जलता  हूँ, मैं तपता हूँ, कनक बन मुस्कराता  हूँ, किनारा ढूँढ़ता हूँ 

मैं बनके प्रेम का झरना, दिलों को पास लाता हूँ , किनारा ढूँढ़ता हूँ 
बहेगी प्रेम की सरिता, ख़ुशी के गीत गाता   हूँ ,  किनारा ढूँढ़ता हूँ 

समाऊंगा मैं ज्योति मैं, मैं दिल से दिल मिलाता हूँ, किनारा ढूंढता हूँ 
मरण शैया पे सोया हूँ , बिदाई गीत गता हूँ, किनारा ढूंढता हूँ  
                                                                                  ___संकल्प सक्सेना 'लवि'।

Thursday, November 15, 2012

मोहब्बत


जन्म लिया और मोहब्बत हो गयी 

पहले माँ से फिर जहां से 



फिर समय बदला 
हुआ परिचय
कहीं धरम , कहीं करम से 



हुआ एहसास यह मिटटी भी माँ है 
खेल कर जीवन की होली 
मुझको भी मरना यहाँ है 
कुछ करम करना यहाँ है 
गोद में सोना यहाँ है 



जीना नहीं कुछ पल मुझे है 
हर पल मुझे जीवित है करना 
मेरे पल के साथियों का 
हर पल मुझे गुलज़ार करना 
मेरे अपने संसार के लिए



हो जहां प्रीतम, मेरा घर 
हो जहां बचपन , मेरा घर
प्रेम की 'लवि' कल्पना में 
मिटटी मेरीभारतमेरा घर



____संकल्प सक्सेना 'लवि'


Tuesday, October 9, 2012

एक बरस पहले






हमारे दिल अज़ीज़ ग़ज़ल गायक जगजीत सिंह जी को श्रद्धांजलि

एक बरस पहले

एक बरस पहले
रोई थीं ग़ज़लें
सिसकी थीं नज़्में
मौसिक़ी का फ़रिश्ता रुला जा रहा था ।

ग़म था छाया फ़िज़ां में
छलके मयक़दे भी
पीर से दिल का अम्बर फटा जा रहा था
मौसिक़ी का फ़रिश्ता रुला जा रहा था ।

दिल कोने में छिपकर
पीर ग़ालिब की छलकी
मीर के आंसुओं सा बहा जा रहा था
मौसिक़ी का फ़रिश्ता रुला जा रहा था ।

आज भी गूंजती हैं
फ़िज़ा में सदायें
हर्फ़ आते हैं लब पे, जैसे तेरी दुआएं
'लवि' यादों में तेरी बहा जा रहा था
मौसिक़ी का फ़रिश्ता चला जा रहा था
मौसिक़ी का फ़रिश्ता रुला जा रहा था ।

                                                                                ___ संकल्प सक्सेना 'लवि' ।